Shekhar Gore 
राज्य

'मोका' में फंसे शेखर गोरे के छुटकारे के लिये बहना दौडी, पत्नि ने भी बजाया बिगुल !

शेखर गोरे पर हुई 'मोका' की कार्रवाई से माण की राजनीति को नया मोड देने वाली साबित हुई है. इस से राष्ट्रवादी काँग्रेस का भरोसे का उम्मीदवार खतरे में फंस चुका है. दूसरा उम्मीदवार चुनने की बजाय राष्ट्रवादी ने शेखर गोरे को इस आफत से उबारने के प्रयास तेज़ कर दिये हैं. यही वजह है कि, पार्टी के नेता इस कार्रवाई को राजनैतिक विद्वेष से प्रेरित बता रहे हैं.

सरकारनामा ब्युरो

सातारा : ' मोका' कानून के तहत अपराधी करार दिये जाने की वजह से , माण विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी के नेता शेखर गोरे की राजनैतिक अस्तित्व खतरे में है. उन्हें इस से उबारने के लिये राष्ट्रवादी के नेता प्रयत्नशील हैं. खास बात यह है कि, शेखर गोरे की बहन सुरेखा पखाले और पत्नि सोनल गोरे, दोनों ही इस प्रक्रिया में आक्रामकता के साथ उतरीं हैं.

शेखर गोरे पर हुई 'मोका' की कार्रवाई से माण की राजनीति को  नया मोड देने वाली साबित हुई है. इस से राष्ट्रवादी काँग्रेस का भरोसे का  उम्मीदवार खतरे में फंस चुका है. दूसरा उम्मीदवार चुनने की बजाय राष्ट्रवादी ने शेखर गोरे को इस आफत से उबारने के प्रयास तेज़ कर दिये हैं. यही वजह है कि, पार्टी के नेता इस कार्रवाई को राजनैतिक विद्वेष से प्रेरित बता रहे हैं. लेकिन इस संबंध में आवाज उठाने की पहल शेखर गोरे की बहन सुरेखा पखाले ने की. भाई को बचाने के लिये वे बेहद आक्रामक हो चुकी हैं और वे इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनैतिक विद्वेष से प्रेरित बतातीं हैं. 

उन्हीं की तरह शेखर गोरे की पत्नि सोनल गोरे ने भी इस बात को ले कर आक्रामक रवैया अपना लिया है. दहिवडी में  एक सभा और उस के बाद सोमवार ( २७ नवंबर) को सातारा में  राष्ट्रवादी युवक काँग्रेस की एक रॅली के अंतर्गत ज़िलाधिकारी कार्यालय के सामने हुई सभा में भी सोनल गोरे ने अपने भाषण में  शेखर गोरे की तरफदारी करते हुए अपनी भूमिका मज़बूती के साथ पेश की. ज़िलाधिकारी श्वेता सिंघल के आगे भी उन्हों ने , अपने पति के निर्दोष होने और  राजनैतिक विद्वेष की भावना के कारण ही उन्हें आपराधिक साबित किये जाने की बात बड़े पैने ढंग से कही. सोनल गोरे ने कहा, " माण- खटाव तहसील की आम  जनता के हित के लिये निस्वार्थ रूप से कार्यरत रहने के बावजूद भी उन पर राजनैतिक दबाव की वजह से फिरौती माँगने जैसे जुर्म लगाये गये हैं. माण विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में बढ़ते उन के प्रभाव से कई लोगों को जलन हो रही है. गोरे के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने के उद्देश्य से ही यह अन्यायकारक कार्रवाई की गयी है. इस झूटे आरोप के खिलाफ राष्ट्रवादी के विधायकों को अधिवेशन में आवाज उठानी चाहिये. गोरे को न्याय दिलाने के लिये हमारे परिवार को माण-खटाववासी जनता और राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी का ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है. हम कानूनी लडाई लड़ रहे हैं. न्यायदेवता पर हमें पूरा विश्वास है. जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब हम यह लडाई लडते रहेंगे."

सुरेखा पखाले ने कहा कि, अपनी कमाई से एक रुपया खर्चने में भी हम पहले सोचते हैं, लेकिन हमारे शेखरभाऊ(भाई )अपनी मेहनत से कमाये करोडों रुपये जनता के विकास के कामों में लगा देने में ज़रा भी नहीं हिचकते. ऐसा व्यक्ति क्या किसी से फिरौती माँग सकता है , यह तो शोध का विषय हो सकता है. इस मामले की वास्तविकता जानने के उद्देश्य से , कंपनी के व्यवस्थापक और फरियादी अर्थात विशाल बहादुर की नार्को टेस्ट करायी जाये. आज कितने ही कुख्यात अपराधी गंभीर अपराध करने के बावजूद भी खुलेआम घूमते हैं . इसी तरह जिन किसानों पर अन्याय हुआ है, उन के द्वारा की जाने वाली शिकायत दर्ज न करते हुए सिर्फ प्रेक्षक की भूमिका अदा की जाती है. ये बातें आयजी और पुलिस प्रशासन को दिखायी नहीं देतीं . अपितु, केंद्र तथा राज्य के अंतर्गत राजनैतिक दबाव के कारण , जनता के लिये संघर्ष करने वाले नेतृत्व को झूटे आरोप में ' मोका' लगा दिया जाता है. इसी वजह से जनता में उद्रेक दिखायी दे रहा है और शेखरभाई पर हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने तथा पीडित किसानों को न्याय दिलाने के लिये हम प्रयास कर रहे हैं.

सरकारनामाचे सदस्य व्हा

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